सिमडेगा : नक्सलियों के टॉप लीडर अपने बच्चों को आइआइटी में पढ़ाते
हैं. गरीब आदिवासी के बच्चों को बंदूक थमा कर उन्हें जंगलों की खाक छानने
के लिए छोड़ देते हैं. आदिवासी बहुल जिले में उग्रवाद के नाम पर नक्सली
गरीबों का शोषण करते हैं. उक्त बातें सिमडेगा अस्थायी पुलिस कैंप में पुलिस
द्वारा ‘उग्रवाद से क्या खोया क्या पाया’ विषयक महापंचायत में सीआरपीएफ
के आइजी संजय आनंद लाटकर ने कहीं.
उन्होंने लोगों से अपील की कि नक्सलवाद को खत्म करने के लिए व्यापक
जन आंदोलन करना होगा. प्रशासन की खामियां भी दूर करनी होगी. महापंचायत में
जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से नक्सलवाद से प्रभावित महिलाओं को भी
महापंचायत में बुलाया गया. आपबीती सुनाते हुए बोलबा की बासमती दास रो
पड़ीं. उनके साथ दर्शक दीर्घा में बैठे लोग भी रो पड़े. उनके पति व ससुर को
एक ही रात मौत के घाट उतार दिया गया था. बानो की बसंती देवी अपने पति की
मौत से गुस्से में थीं. उन्होंने कहा कि सरकार उनके बेटे को पुलिस में
नौकरी दे. वह उग्रवादियों से बदला लेगा. वह बेटे को चना बेचते नहीं देखना
चाहतीं. रामू गंझू , संतोष भोक्ता, महेश सिंह जो उग्रवादी संगठनों के
सबजोनल कमांडर हैं, उनके परिजनों ने अपने बेटों से अपील की कि हिंसा का
रास्ता छोड़ कर वे लोग मुख्य धारा से जुड़ें. पीएलएफआइ के सबजोनल कमांडर की
मां ने मंच से कहा कि वह अपने बेटे से पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने के
लिए कहेगी.
डीसी विजय कुमार सिंह ने कहा कि विकास के लिए उग्रवाद का रास्ता
छोड़ना होगा. उग्रवाद के खिलाफ बड़े उलगुलान की जरूरत है. कहा कि पूर्व में
नक्सली तथा अपराधी घटना में मारे गये लोगों के परिजनों को भी सहायता दी
जायेगी, जिन्हें अब तक कोई सहायता नहीं मिली.
कहा कि अब तक नक्सल हिंसा में मारे गये लोगों के परिजनों के 86 मामले
आये हैं. 27 आश्रितों को नौकरी दी गयी. 48 की अनुशंसा जिला प्रशासन ने की
है. कहा कि 1.35 करोड़ रुपये का मुआवजा सह सहयोग राशि प्रदान की गयी है़.
मंच पर विधायक विमला प्रधान, पूर्व महालेखाकार बेंजामीन लकड़ा, मनोज
नगेसिया, झारखंड जगुआर के आइजी प्रशांत सिंह, डीआइजी रांची जोन रविकांत
धान, अजीत लकड़ा ने भी अपने विचार रखे.

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