इससे पहले बड़कागांव के पूर्व विधायक सह पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को पुलिस ने हजारीबाग के हुरहुरू स्थित आवास से मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया. वह चीरूडीह-डाढीकला में पुलिस व विस्थापितों के बीच हुए हिंसक झड़प मामले (228-16) में नामजद आरोपी हैं. मंगलवार सुबह श्री साव को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस उन्हें मुफस्सिल थाना ले आयी और करीब नौ घंटे तक रखा. शाम को उन्हें सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया. इसके बाद जेल भेज दिया गया.
krlnews
Wednesday, 5 October 2016
बड़कागांव गोलीकांड: विपक्ष ने निकाला राजभवन तक मार्च
इससे पहले बड़कागांव के पूर्व विधायक सह पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को पुलिस ने हजारीबाग के हुरहुरू स्थित आवास से मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया. वह चीरूडीह-डाढीकला में पुलिस व विस्थापितों के बीच हुए हिंसक झड़प मामले (228-16) में नामजद आरोपी हैं. मंगलवार सुबह श्री साव को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस उन्हें मुफस्सिल थाना ले आयी और करीब नौ घंटे तक रखा. शाम को उन्हें सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया. इसके बाद जेल भेज दिया गया.
Tuesday, 4 October 2016
हमर बेटवा के का कसूर हलय गे मईया ..
हजारीबाग : चिरुडीह गोलीकांड में सोनवर्षा के दो, चेपाखुर्द व ¨सदूआरी के एक की जान गई। पूरा गांव घटना के तीसरे दिन भी चीत्कार, कंद्रन से गूंज रहा है। मोहल्लों व टोला में मातमी सन्नाटा पसरा है। घर पर परिजनों को सांत्वना देने के लिए तांता लगा है। मां, पत्नी व वृद्धों के आंखों से आंसू नहीं सूख रहे है। छोटे बच्चे कभी मां और कभी दादा-दादी के चेहरे देखकर आश्चर्यचकित है। तो कोई अपनी देहरी पर बैठकर नेता, राजनीति पुलिस और एनटीपीसी के साथ त्रिवेणी को कोस रहा है। ये हाल उन गांवों की है जहां के चार बेटों ने अपनी जान भीड़ का हिस्सा बनने में चली गई। ¨सदुआरी का 16 वर्षीय रंजन पिता स्व कारीनाथ राम ग्यारहवीं का छात्र था। वह इंदिरा गांधी इंटर कॉलेज बड़कागांव में पढ़ता था। उसे गर्दन में गोली लगी, जिसे कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वह टूयूशन पढ़कर लौट रहा था, जब तक कुछ समझ पाता वह अपनी साइकिल के साथ गोली लगने से गिर पड़ा और उसकी जान चली गई। पांच साल पहले अपना पति को खो चुकी विधवा मां अपने बेटे की याद में बार-बार बेहोश हो जा रही है। मजदूरी कर अपने दो बेटों को शिक्षा देनेवाली मां होश आने पर एक ही रट लगा रही है कि हमर बेटवा का कसूर हलव गे मईया.. उकरा काहें मार देलथिन गे..
कुछ इसी तरह का हाल सोनवर्षा के अभिषेक कुमार राय के घर में है, जहां 18 वर्षीय पोते के खोने में गम में समाज मे अलग पहचान रखने वाले दादा शिव कुमार राय संभाले नहीं संभल रहे है। पिता पवन कुमार राय व अन्य परिजनों के आंसू भी रोके नहीं रुक रही है। बीए पार्ट वन का छात्र अभिषेक सोनवर्षा नदी में शौच के लिए गया था, बगल के गांव में भीड़ देखकर वह चला गया। दो भाइयों में वह सबसे छोटा था।
वहीं शनिवार को हमेशा की तरह 42 वर्षीय मो. मेहताब पिता मो . मोजीब भी अपने खेतों की ओर निकले थे। भीड़ और वाहनों का काफिला देखकर वह भी उसी ओर लपक पड़े। भीड़ का हिस्सा बनना उनके जीवन की सबसे बड़ी भूल साबित हुई। मेहताब की पत्नी बार बार वह बेहोश हो जा रही हैं। उनके तीन बच्चों में बड़ी बेटी
आठ वर्षीय सुहानी तो कुछ समझ रही है, लेकिन छोटे भाई शहबाज, सरफराज कभी अपनी मां और कभी अपने दादा का चेहरा देख रहा है। पूरा परिवार सदमे में है।
गांव छोड़ भागे पुरुष, पसरा सन्नाटा
कश्मीर में उपद्रवियों से ज्यादा घायल हुए जवान : डीजी
सीआरपीएफ के डायरेक्टर जनरल के. दुर्गा प्रसाद ने कहा है कि कश्मीर में पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर हाय-तौबा मची है लेकिन वहां उपद्रवियों से दस गुना ज्यादा सेना और पुलिस के जवान घायल हुए हैं।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। सीआरपीएफ के डायरेक्टर जनरल के. दुर्गा प्रसाद ने कहा है कि कश्मीर में पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर हाय-तौबा मची है लेकिन वहां उपद्रवियों से दस गुना ज्यादा सेना और पुलिस के जवान घायल हुए हैं। मंगलवार को शहर पहुंचे के. दुर्गा प्रसाद ने पत्रकारों को बताया कि पिछले दिनों घाटी में उपद्रवियों के पथराव से सीआरपीएफ के 3000 जवान घायल हुए थे, जिनमें करीब 125 अति गंभीर हैं। बीएसएफ, राष्ट्रीय राइफल्स समेत अन्य टुकडिय़ों को मिलाकर करीब 10,000 जवान घायल हुए हैं। कश्मीर में फिलहाल पावा गैस शेल, स्टन गन व प्लास्टिक पिलेट का प्रयोग किया जा रहा है। यदि इससे भी उपद्रवियों पर काबू नहीं पाया जा सका, तब फिर पिलेट गन का इस्तेमाल होगा।
रांची में प्रतिनियुक्त होगी कश्मीर में प्रशिक्षित महिला बटालियन
उन्होंने बताया कि सीआरपीएफ की एक महिला बटालियन कंपनी को विशेष रूप से प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसे 10 दिनों के अंदर रांची में प्रतिनियुक्त कर दिया जाएगा। यह कंपनी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र में विशेष रूप से काम करेगी। प्रसाद सुंदरनगर में रैफ-106 बटालियन के जवानों के लिए बन रहे आवास की आधारशिला रखने आए थे।
उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ जवान झारखंड में नक्सलियों के साथ-साथ देशविरोधी ताकतों का भी डटकर मुकाबला करेंगे। हाल के वर्षों में झारखंड, छत्तीसगढ़ व महाराष्ट्र में माओवादियों का काफी हद तक प्रभाव कम हुआ है। बिहार, छत्तीसगढ़ समेत नौ राज्यों में एक साथ उग्रवाद विरोधी अभियान चलाया गया है।
उन्होंने कहा कि एंटी नक्सल अभियान उन इलाकों में विशेष रूप से चलाया जा रहा है जहां उनकी सक्रियता अधिक रहती है। सामान्यत: मानसून के समय में उग्रवादियों के खिलाफ पुलिसिया ऑपरेशन की गति धीमी हो जाती है लेकिन इस साल हमने बीते कुछ महीनों में 11 ऑपरेशन चलाए। कई उग्रवादी शिविरों को ध्वस्त कर दिया। कुछ माओवादी मारे गए तो कुछ गिरफ्तार किए गए।
Sunday, 2 October 2016
बड़कागांव में आंदोलनकारियों पर पुलिस फायरिंग में तीन मरे, CM दास ने दिया जांच का आदेश
हजारीबाग : झारखंड के हजारीबाग जिले के
बड़कागांव के चिरूडीह में एनटीपीसी के विरोध में चल रहे कफन सत्याग्रह के
दौरान पुलिस बल व आंदोलन कर रहे लोगों के बीच हुई झड़प के बाद स्थिति को
नियंत्रित करने के लिए की गयी पुलिस कार्रवाई में कम से कम तीन लोगों की
मौत हो गयी है, जबकि एक व्यक्ति अति गंभीर रूप से घायल है. घायलों की कुल
संख्या आठ बतायी जाती है. इस घटना में सात पुलिस वाले भी घायल हुए हैं.
दोनों पक्षों में झड़प आज तड़के आंदोलन का नेतृत्व कर रही कांग्रेस विधायक
निर्मला देवी को पुलिस हिरासत में लिये जाने के बाद शुरू हुई. विधायक
समर्थकों ने उन्हें पुलिस के कब्जे से छुड़ा लिया और भीड़ पथराव करने लगी.
जिसके बाद हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने गोलीबारी की. गोलीबारी
में मारे गये लोगों का नाम मोहम्मद मेहताब, अभिषेक कुमार राय व रंजन
कुमार राय है. गंभीर रूप से घायल राजेश को अन्य घायलों के साथ रांची रेफर
किया गया है, जहां उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है. अमेरिका के दौरे पर गये
मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मृतकों के परिवार के प्रति संवेदना जतायी है और
जांच का आदेश दिया है. घटनास्थल पर तनाव तब बढ़ा जब विधायक निर्मला देवी को पुलिस बल ने अपने कब्जे में ले लिया, जिनके नेतृत्व में पिछले 15 दिन से आंदोलन चल रहा था. उनके व 150 अन्य लोगों के खिलाफ एफआइआर भी दर्ज की गयी थी. ग्रामीण सीओ के नेतृत्व में हुई इस प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध करने लगे. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठी चार्ज किया, जिसके बाद लोगों ने पुलिस पर पथराव कर दिया.प्राप्त जानकारी के अनुसार आंदोलन को उग्र होता देख पुलिस ने अंतत: फायरिंग की, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गयी, जबकि आठ लोग घायल हो गये. आंदोलनकारियों ने सीओ की गाड़ी को आग लगी थी. हिंसा में एएसपी व सीओ भी घायल हुए हैं, जिनका इलाज चल रहा है.झारखंड पुलिस ने इस संबंध में विस्तृत बयान जारी किया है
Wednesday, 28 September 2016
पाक ने किया सीजफायर का उल्लंघन, भारतीय जवानों ने दिया जवाब, दो पाकिस्तानी जवान ढेर
जम्मू : उरी
आतंकी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में पाकिस्तान ने फिर से
सीजफायर तोड़ा है. लाइन ऑफ कंट्रोल के पास मेंढर इलाके में गुरुवार सुबह
पाकिस्तान की ओर से फायरिंग की गई है जिसका भारतीय सेना की ओर से मुंहतोड़
जवाब दिया गया.इससे पहले बुधवार को पाकिस्तानी सैनिकों ने जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा पर भारतीय ठिकानों को निशाना बनाकर गोलीबारी की. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि गोलीबारी में कोई हताहत नहीं हुआ.
पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘पाकिस्तानी सैनिकों ने बुधवार शाम पुंछ जिले के साब्जियान इलाके में छोटे हथियारों से गोलीबारी की.'
आपको बता दें कि उरी आतंकी हमले के दो दिन बाद 20 सितम्बर को पाकिस्तानी सैनिकों ने कश्मीर के इसी सेक्टर में सीमा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन किया था. बीते छह सितम्बर को पाकिस्तानी सेना ने पुंछ में भारतीय ठिकानों पर 120 एमएम मोर्टार से गोलाबारी की थी.
इस गांव में लड़कियां करती हैं लड़कियों से ही शादी, पुरुषों को रखती हैं खुद से दूर
जयपुर।शहर में एक ऐसी लेस्बियन की स्टोरी सामने आई है जिसने
अपनी पार्टनर से शादी रचाने तक का दावा किया है। उसका कहना है कि वे दोनों
पिछले 3 सालों से एक दूसरे के साथ रिलेशन में थीं। ऐसे में krlsnews.blogspot.com आपको तंजानिया के एक ऐसे गांव से रूबरू करा रहा है जहां
लड़कियां लड़कों के साथ शादी नहीं करती हैं। क्या है इसके पीछे वजह…- आपको ऐसा लगता होगा कि ये महिलाएं होमो सेक्सुअल हैं पर ऐसा नहीं है।
- इसके पीछे एक पुरानी परंपरा है जो पुरुषों को समाज में दोयम दर्जे में रखती है।
- ये तंजानिया का एक गांव है जहां की जनजाति को पुरुष प्रधान मानसिकता से चिढ़ है।
- इस गांव में महिलाओं की तूती बोलती है। यहां महिलाओं के मामले में पुरुष का हस्तक्षेप न हो।
- इसलिए लड़कियों की शादी लड़कियों के साथ ही की जाति है।
- इससे प्रॉपर्टी से लेकर और किसी भी मामले में मर्द अपना हक नहीं जमा सकें।
- यहां मई किसी महिला ओ बिना उसकी मर्जी के छू भी नहीं सकते हैं।
- महिलाएं ही तय करती हैं कि समाज कैसे चलेगा और घर की मुखिया महिला ही होती हैं।
- शादी के पीछे लेस्बियन होना वजह नहीं है। केवल पुरुषों को खुद के इशारे पर नचाने के लिए महिलाएं ऐसा करती हैं।
- पुरुषों को न तो प्रॉपर्टी में हक मिलता है और न ही वो किसी निर्णय में।
- यहां कोई मर्द जबरदस्ती करता है तो उसे बाकायदा सजा दी जाती है।
- महिला (पति) बाकायदा घर से बाहर जाकर काम करती है बल्कि महिला (पत्नी) घर के काम संभालती है।
- यदि महिला (पत्नी) को बच्चे पैदा करने की जरूरत हो तो वो खुद से किसी व्यक्ति का चुनाव कर सकती है या उसकी महिला (पति) किसी पुरुष का चुनाव करती है।
- इसके बाद होने वाले बच्चे को पिता का नाम महिला (पति) ही देती है।
