हजारीबाग : चिरुडीह गोलीकांड में सोनवर्षा के दो, चेपाखुर्द व ¨सदूआरी के एक की जान गई। पूरा गांव घटना के तीसरे दिन भी चीत्कार, कंद्रन से गूंज रहा है। मोहल्लों व टोला में मातमी सन्नाटा पसरा है। घर पर परिजनों को सांत्वना देने के लिए तांता लगा है। मां, पत्नी व वृद्धों के आंखों से आंसू नहीं सूख रहे है। छोटे बच्चे कभी मां और कभी दादा-दादी के चेहरे देखकर आश्चर्यचकित है। तो कोई अपनी देहरी पर बैठकर नेता, राजनीति पुलिस और एनटीपीसी के साथ त्रिवेणी को कोस रहा है। ये हाल उन गांवों की है जहां के चार बेटों ने अपनी जान भीड़ का हिस्सा बनने में चली गई। ¨सदुआरी का 16 वर्षीय रंजन पिता स्व कारीनाथ राम ग्यारहवीं का छात्र था। वह इंदिरा गांधी इंटर कॉलेज बड़कागांव में पढ़ता था। उसे गर्दन में गोली लगी, जिसे कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वह टूयूशन पढ़कर लौट रहा था, जब तक कुछ समझ पाता वह अपनी साइकिल के साथ गोली लगने से गिर पड़ा और उसकी जान चली गई। पांच साल पहले अपना पति को खो चुकी विधवा मां अपने बेटे की याद में बार-बार बेहोश हो जा रही है। मजदूरी कर अपने दो बेटों को शिक्षा देनेवाली मां होश आने पर एक ही रट लगा रही है कि हमर बेटवा का कसूर हलव गे मईया.. उकरा काहें मार देलथिन गे..
कुछ इसी तरह का हाल सोनवर्षा के अभिषेक कुमार राय के घर में है, जहां 18 वर्षीय पोते के खोने में गम में समाज मे अलग पहचान रखने वाले दादा शिव कुमार राय संभाले नहीं संभल रहे है। पिता पवन कुमार राय व अन्य परिजनों के आंसू भी रोके नहीं रुक रही है। बीए पार्ट वन का छात्र अभिषेक सोनवर्षा नदी में शौच के लिए गया था, बगल के गांव में भीड़ देखकर वह चला गया। दो भाइयों में वह सबसे छोटा था।
वहीं शनिवार को हमेशा की तरह 42 वर्षीय मो. मेहताब पिता मो . मोजीब भी अपने खेतों की ओर निकले थे। भीड़ और वाहनों का काफिला देखकर वह भी उसी ओर लपक पड़े। भीड़ का हिस्सा बनना उनके जीवन की सबसे बड़ी भूल साबित हुई। मेहताब की पत्नी बार बार वह बेहोश हो जा रही हैं। उनके तीन बच्चों में बड़ी बेटी
आठ वर्षीय सुहानी तो कुछ समझ रही है, लेकिन छोटे भाई शहबाज, सरफराज कभी अपनी मां और कभी अपने दादा का चेहरा देख रहा है। पूरा परिवार सदमे में है।
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